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कवन जाति?

जातीय बहस पर मजा लेने के लिए, शानदार मसाला😄😄😄😄😄 और ए पूरी तरह C/P किया हुआ है। इसकी कोई भी बात प्रमाणिक होने का दावा नहीं है। ऐसे में दिमाग का खुला होना बेहद जरूरी है और इसे किसी पक्ष-विपक्ष में न माना जाय। वैसे इसके मनोरंजक होने में कोई संदेह नहीं है-👉👉जैसे कि एक सवर्ण बहस कर रहा है- "जब आरक्षित वर्गीय के घर आरक्षित वर्गीय ही पैदा होता है ....और अनारक्षित के अनारक्षित ....यह वर्ग की ही बीमारी है ......मैं कहता हूँ .....मैं जन्म से सवर्ण हूँ ....पर सामाजिक आर्थिक स्तर से शूद्र ......पर ये वर्ग योजना मुझे sc का प्रमाण पत्र नहीं देगी ........तो सवर्ण के सवर्ण होना तो मजबूरी भी है और लाजिमी भी .....👉👉एक पोस्ट ए भी मिली कि "लोग ए भी जान लें तो अच्छा होगा कि कौन लोग कैसे थे जो बाद में ब्राह्मण बने- a) ऐतरेय ऋषि दास अथवा अपराधी के पुत्र थे। परन्तु उच्च कोटि के ब्राह्मण बने और उन्होंने ऐतरेय ब्राह्मण और ऐतरेय उपनिषद की रचना की। ऋग्वेद को समझने के लिए ऐतरेय ब्राह्मण अतिशय आवश्यक माना जाता है।
(b) ऐलूष ऋषि दासी पुत्र थे। जुआरी और हीन चरित्र भी थे। परन्तु बाद मेंउन्होंने अध्य…

राज्यों का पुनर्गठन

राज्यों के पुनर्गठन की आवश्यकता-
जैसा कि सब लोग अवगत हैं कि उ०प्र० आबादी की दृष्टि से पूरी दुनिया में एक बड़ी इकाई है और इसके विकसित हुए बिना भारत अपने लक्ष्यों को नहीं प्राप्त कर सकता इसके लिए   इसे तीन भागों में बाँटा जाना अति आवश्यक है। जिससे प्रशासनिक, सामाजिक, आर्थिक लक्ष्यों को हासिल किया जा सके। जो कुछ इस प्रकार हो सकता है-
(1) उ० प्र०- इसमें केन्द्रीय संभाग के 10 जिले और पूर्वी संभाग के 28 जिले मिलाकर यानी कि 38 जिलों का प्रदेश हो जिसके विकास के लिए- कानपुर, लखनऊ, गोरखपुर, बनारस और इलाहाबाद का एक पंचभुज हो सकता है, जो इस प्रदेश के विकास के लिए इंजन का काम करेंगे।
(2) रूहेलखंड - इसमें पश्चिमी संभाग के 30 जिलों से बनाया जाना चाहिए।
(3) बुंदेलखंड- इस संभाग में UP के 7 जिले आते है और तकरीबन इतने ही जिले MP के आते हैं। यह इलाका हमारे काफी पिछड़े क्षेत्रों में से एक है। ऐसे में इसके समग्र विकास के लिए एक राज्य के रूप इसका अस्तित्व अति आवश्यक है।
    वैसे और भी प्रदेश हैं जो उस हाथी की तरह हैं जिसके सभी अंग सही ढंग से काम नहीं कर रहे है और उस राज्य के अंदर ही घोर विषमता है ऐसे में उन…

Politics of name

सोचिए क्या बदला है और क्या सचमुच किसी वास्तविक बदलाव की कोशिश की जा रही है। सब कुछ  एक विज्ञापन जैसा ही है। जहाँ नया गढ़ सकने में नाकाम लोगों को पुराने की नयी पैकेजिंग ही आसान लगती है। जबकि पुराने को मिटाने के बजाय सहेज़ने की जरूरत है। यह कुछ ऐसे ही है कि किसी लाइन को छोटी करने के लिए उसे मिटाते रहे और इस कोशिश में न जाने कितनी टूटी फूटी लकीरें खिंच गयी और उसके चारों तरफ मिटाने के निशान पड़ गए। जबकि उसे छोटी करने के लिए सिर्फ इतना करना था कि उसके आसपास एक बड़ी लाइन खींचनी थी। इससे हमारे पास दो लाइनें होती और उन पर ढेरों शब्द अपनी-अपनी जगह पर जम जाते। वैसे भी आप एक व्यक्ति नहीं हैं, आप सरकार हैं, आप हमको नए शहर, नए बाजार, नए अस्पताल, ... दीजिए। उसके नाम जो मर्जी हो रख दीजिए। किसी को फर्क नहीं पड़ता। बस यह सोचना होगा कि आखिर हासिल क्या हुआ और हमने क्या-क्या खो दिया।इसी संदर्भ में एक पुरानी पोस्ट शेयर कर रहे हैं- जो
Tuesday, 17 July 2012 का है।'नई सरकार- नए नाम'सुनने में आ रहा है कि हमारे वर्तमान मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा अपनी विचार धारा के लोगों और शब्दों से जिन जिलो…

education

शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर हमने भी अपने मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखा और उसे उनके fb पेज और what's app पर post कर दिया। 😀😀😀खुशी की बात ए है कि c/p के खेल में मेरा नाम ही खत्म हो गया😁😁😂😂😂 खैर बात आगे बढ़नी चाहिए और अधिक अच्छे सुझावों के साथ। यही सोचकर हमने सोचा चलो अपनी wall पर भी ... वैसे हमारा प्रदेश उ०प्र० है जो दुनिया में आबादी के मामले में पाँचवा स्थान रखता है यानिकि कि सिर्फ चार देशों की आबादी इससे ज्यादा है😀😁😁😂😂😂😂😂
आदरणीय मुख्यमंत्री जी,
बड़ी विनम्रता के साथ शिक्षा व्यवस्था और चयन प्रक्रिया के सन्दर्भ में कुछ सुझाव देना चाहता हूँ। वर्तमान में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से माफिया के हाथों  मे जा चुकी है जो उसके संचालन, नकल और प्रकाशन तीनों को नियंत्रित कर रहा है। इसका परिणाम हम private school की जरूरत से ज्यादा मँहगी पाठ्य सामग्री के रूप में  दे सकते हैं। व्यवस्था सुधार के लिए कुछ इस तरह के प्रयास किए जा सकते हैं-
(1) प्रदेश में CBSE Board का पाठ्यक्रम और सिर्फ  NCERT कि किताबें लागू की जाय। इसका फायदा यह होगा कि हमारे छात्र अखिल भारतीय प्रतियोगी परीक्षाओं…